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Bihar News: खान सर की अग्रिम जमानत पर आज अहम सुनवाई, पटना कोर्ट में टिकी सबकी नजर

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Alam Ki Khabar: पटना फायरिंग और हत्या के प्रयास मामले में खान ग्लोबल स्टडीज के निदेशक फैजल खान उर्फ खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर आज अदालत में सुनवाई होगी। उनके सहयोगियों की याचिकाओं पर भी कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है।

पटना, 8 जुलाई। आलम की खबर: राजधानी पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र में खान ग्लोबल स्टडीज के पास हुई कथित फायरिंग और हत्या के प्रयास के मामले में मंगलवार को न्यायिक प्रक्रिया का अहम चरण शुरू होने जा रहा है। पटना की अदालत में खान ग्लोबल स्टडीज के निदेशक फैजल खान उर्फ खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। इसी मामले में उनके सहयोगी अजीत कुमार, कन्हैया कुमार सिंह और अंकित कुमार पाण्डेय की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर भी अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। मामले में खान सर के दो सुरक्षा कर्मियों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई प्रस्तावित है। यह मामला उस कथित फायरिंग की घटना से जुड़ा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस ने वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर खान सर, उनके सुरक्षा कर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास तथा आग्नेयास्त्रों के कथित अवैध इस्तेमाल सहित विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। पिछली सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि खान सर ने अपने हलफनामे में एक पुराने आपराधिक मामले का उल्लेख नहीं किया। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि उस मामले में अदालत पहले ही उन्हें दोषमुक्त कर चुकी है, इसलिए उसका इस जमानत याचिका से कोई संबंध नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पूरक आवेदन और उसके जवाब के लिए समय देते हुए सुनवाई 8 जुलाई तक स्थगित कर दी थी। इसी दौरान अदालत ने खान सर और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक भी जारी रखी थी। अब आज की सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि उन्हें नियमित अग्रिम जमानत का लाभ मिलेगा या नहीं। इस कारण इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

अदालती प्रक्रिया का सम्मान जरूरी

किसी भी आपराधिक मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय ही करता है। आरोप लगना और दोष सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए अदालत की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक सभी पक्षों के अधिकारों और कानून के सिद्धांतों का सम्मान किया जाना चाहिए।

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